रिसर्च का आरंभ — पुरुषों से खबरदार

October 20, 2008

जैसे ही मैं ने रिसर्च ज्वायन की, मेरी सीनियर्स ने बुला कर एक वार्निंग दे दी कि सावदान रहना. इस डिपार्टमेंट की स्पेशियालिटी है कि जो भी स्त्रियां रिसर्च के लिये आती हैं वे काफी एक्सपीरियंस लेकर ही जाती हैं.

मेरे साथ एक डिफिकल्टी यह थी कि एमए में मेरा सब्जेक्ट हिन्दी नहीं था. सोशियोलजी से एमए किया. यहां लेकिन सिर्फ हिन्दी में ही रिसर्च कि फसिलिटी थी. पिताजी की जिद थी कि मैं पीएचडी जरूर करु. ट्रांसफर होकर इस शहर में आये थे. सब नया था. लेकिन सुना था कि हिन्दी के हेडआफ डिपर्टमेंट बडे कंपाशनेट हैं.

पिताजी ने उनसे मुलाकात की. अगले दिन मुझे बुलाया एवं देखते ही हिन्दी में रिसर्च ज्वायन करने का आर्ड दे दिया. अगले दिन ज्वायन कर लिया.

लेकिन पहला एक्सपीरियेंस अच्छा नहीं लगा जब सीनियरस ने वार्निंग दी.


क्या लिखूँ ??

October 19, 2008

मैं ने 2007 मे चिट्ठाकारी शुरू करी थी,
लेकिन मेरे कविता की गलतियों के कारण
मैं ने आगे कुछ नहीं लिखा.

मित्रगन माफ करें. भाषा काफी सुधर गई है.
आगे लिखने के लिये मेरी मदद कीजिये.

मैं कई विशयों पर लिखना चाहती हूँ.
खास कर रिसर्च करते समय कितना
शोषण होता है इस बात पर. मेरा मतलब
विद्यार्थिनीयों के शोषण से है.

यदि आप का प्रोत्साहन मिला तो मैं लिखूंगि.
सब कुछ लिखूंगि. कुछ नही छुपाऊगी.

क्या मुझे प्रोत्साहन देंगे. कोई मेरी भाषा
सुधारने में मदद करेगे क्या.

आपके जवाब मिलने के बाद अगला पोस्ट शुरू करूंगी.