यह क्या हो रहा है?

October 19, 2008

आज अपना लेख पोस्ट करने के बाद काफी सारे चिट्ठे देखने का चान्स मिला. अच्छा लगा. सोचने के लिये काफी सामग्री है. लेकीन सामग्री इतनी अधिक है कि कुछ समझ में नहीं आता कि क्या लिखूँ.

यदि आप लोग बता सकें कि आजकल किन विषयों की डिमांड है तो मुझे काफी हेल्प मिल जायगी.

एक हेल्प और: मेरे साथी लोग कहते हैं कि यदि मैं प्योर हिन्दी में लिखने के बदले अपने नेचुरल स्टाईल में लिखुं तो मेरी भाषा में फ्लो आ जाताहै.

क्या इस तरह से नेचुरल भाषा में लिखने पर आप लोगों को कोई विरोध या डिसअप्पोइन्टमेंन्ट होगा या यहां सबको वेलकम है. मुझे तो लगा कि सबको वेलकम है.

असली चीज लेंग्वेज नहीं आईडिया है. आप लोग क्या सुझावे देना चाहते हैं.


कैसा क्रूर है तुम

September 26, 2007

हे ईस्वर,
कैसा है क्रूर तुम.
स्वस्त बचचों को
बुला लेता है.
विकलांगों को
जिन्दगी भर
छोड देता है,
प्रथ्वी पर


अबला या सबला

September 17, 2007

कभी पढा था कि
प्रशन है कि स्त्री अबला है या सबला?
जवाब था कि बला जरुर है।
बताओ आराधना को दोस्तों
कि कितना बडा यह झूठ है।।