यह क्या हो रहा है?

आज अपना लेख पोस्ट करने के बाद काफी सारे चिट्ठे देखने का चान्स मिला. अच्छा लगा. सोचने के लिये काफी सामग्री है. लेकीन सामग्री इतनी अधिक है कि कुछ समझ में नहीं आता कि क्या लिखूँ.

यदि आप लोग बता सकें कि आजकल किन विषयों की डिमांड है तो मुझे काफी हेल्प मिल जायगी.

एक हेल्प और: मेरे साथी लोग कहते हैं कि यदि मैं प्योर हिन्दी में लिखने के बदले अपने नेचुरल स्टाईल में लिखुं तो मेरी भाषा में फ्लो आ जाताहै.

क्या इस तरह से नेचुरल भाषा में लिखने पर आप लोगों को कोई विरोध या डिसअप्पोइन्टमेंन्ट होगा या यहां सबको वेलकम है. मुझे तो लगा कि सबको वेलकम है.

असली चीज लेंग्वेज नहीं आईडिया है. आप लोग क्या सुझावे देना चाहते हैं.

Leave a Reply