आराधना! वंदना!!

आरधना, वंदना एवं स्नेह/शृंगार साथ साथ चलते है. मुझे यह महसूस हुआ जब मैं भक्तिकाव्य में शृंगार रस पर अनुसंधान कर रही थी.

इस चिट्ठे द्वारा मैं अपना अनुसंधान आप लोगों के साथ बांटना चाहती हूं. आप लोगों का मार्गदर्सन भी चाहती हूं जिससे मैं अपने आप को ढूंढ कर पा सकूँ

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