Aaradhna’s Weblog











{September 26, 2007}   कैसा क्रूर है तुम

हे ईस्वर,
कैसा है क्रूर तुम.
स्वस्त बचचों को
बुला लेता है.
विकलांगों को
जिन्दगी भर
छोड देता है,
प्रथ्वी पर



{September 17, 2007}   अबला या सबला

कभी पढा था कि
प्रशन है कि स्त्री अबला है या सबला?
जवाब था कि बला जरुर है।
बताओ आराधना को दोस्तों
कि कितना बडा यह झूठ है।।



{September 16, 2007}   आराधना! वंदना!!

आरधना, वंदना एवं स्नेह/शृंगार साथ साथ चलते है. मुझे यह महसूस हुआ जब मैं भक्तिकाव्य में शृंगार रस पर अनुसंधान कर रही थी.

इस चिट्ठे द्वारा मैं अपना अनुसंधान आप लोगों के साथ बांटना चाहती हूं. आप लोगों का मार्गदर्सन भी चाहती हूं जिससे मैं अपने आप को ढूंढ कर पा सकूँ



{September 16, 2007}   Hello world!

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et cetera